जीवन में इससे क्या सीख मिलती है? – श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक: अपना कर्म ही श्रेष्ठ है **“श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥”**
श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक: अपना कर्म ही श्रेष्ठ है **“श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥”** यह श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय

